Sunday, February 11, 2024

क्यो दौड़ रहे है ये तय करे हम

सबसे पहले हम अपने आप से पूछे की हम दौड़ क्यो रहे है।
सबके दौड़ने के कारण अलग अलग होते है।
शेर दौड़ता है अपने शिकार को पकड़ने के लिए 
हिरण दौड़ता है अपनी जान बचाने के लिए।
अभी हम लोग सिर्फ एडिक्शन या लत के कारण दौड़ रहे है।
किसी को आर्मी में जाना है या पुलिस में भर्ती होना है।
किसी को डॉक्टर ने राय दी है इसलिए दौड़ रहा है।
मैं स्विमिंग करता था 2013 के पहले मैंने हाई बी पी और अस्थमा के लिए दौडना शुरू किया ।
हम सब की उम्र अलग होती है,सबका व्यवसाय अलग होता है  घर की परिस्थितिया अलग अलग होती है। किसी को वर्कआउट करने के बाद दिन भर काम करना है।किसी को कम कार्य करना है ।इस पर भी वर्कआउट निर्भर करेगा।
हमे हमारी प्राथमिकता तय करनी होगी ।क्या जरूरी है ।क्या नही ।
एक फार्मूला सब पर सही नही बैठता है।
एक दिन में कोई चैंपियन भी नही बनता है।
लोग कामरेड जा रहे है तो हमे भी जाना है भले ही कर्ज लेकर जाए क्या ये सही है क्या???
अपनी नौकरी ,काम धंधा छोड़कर वर्कआउट के लिए पागल होना सही नही है।
हर व्यक्ति को तय करना चाहिए की मुझे दौड़ में क्या करना है ।
कम उम्र के बच्चों को 18 से 22 साल वालो को जिला,राज्य,और देश के लेवल पर खेलने का टारगेट रखना चाहिए।
छोटी दौड़ 400,800,1500,3000,5000,मीटर पर फोकस करे क्यो 21 और 42 km करे ,क्यो खरदुल्ला लदाख करे ये मैराथन सिर्फ endurance के लिए है जो सभी जिम्मेदारियों से मुक्त है वो करे।
साल में एक या 2 फुल करे ज्यादा कीड़ा काटता हो तो अन्यथा 20 मिनट रोज दौड़ ले तो ही हम फिट रह सकते है।उसने ये सब किया तो मैं भी ये करूँगा गलत बात है।
हर व्यक्ति को आत्मचिंतन करना चाहिए की हम अपने आप से क्या चाहते है।
कितना वर्कआउट ज्यादा है हमारे लिए ये लक्ष्मण रेखा भी खुद को ही खींचनी होगी।
आर्गेनाइजर तो इवेंट करवाते रहेंगे ।
लोग सोचते है कि तालियाँ बज रही है मतलब हम अच्छा कर रहे है ।लोग डिप्लोमेटिक होते है।ऐसा नही है आप खुश हो तो कोई किसी को दुःखी नही करना चाहता है इसलिए वो ताली बजा देता है या👌 ये कर देता है इसका मतलब ये नही है कि वो आपके अति वर्कआउट से खुश है।जो आपका शुभचिंतक होगा वो टोक ही देगा ।

Sunday, June 19, 2022

चारधाम यात्रा

1 जून से 12 जून 2022 तक कि यात्रा हम लोगो ने प्लान की मैप माय ट्रिप के साथ ।उसमे दिल्ली से पिकअप था टेम्पो ट्रेवलर द्वारा और फिर 12 दिन तक एक ही टेम्पो ट्रेवलर और एक ही ड्राइवर पूरे समय रहेगा ऐसा बताया गया।उसमे ब्रेकफ़ास्ट और डिनर ,होटल का खर्च भी included था।32500 per person
इन्दौर से दिल्ली 3AC के आने जाने के टिकट को मिलाकर 35000 per पर्सन खर्च आना था।
14 मई 2022 तक ही उन्हें 10 लोगो का फुल पेमेंट कर दिया था।29 तारीख तक होटल वाउचर नही मिले तो doubt हुआ कि फर्जी बुकिंग तो नही हुई ।फिर कॉल सेन्टर पर बात की तो बताया कि आपकी बुकिंग नही है।बाद में बताया कि प्लान customise होता है तो my booking ऑप्शन में नही दिखता हैं।
खैर हम लोग 31 मई को indore से निकले 7.30 पर शाम को इन्दौर अमृतसर ट्रैन से अगले दिन सुबह 11 बजे निज़ामुद्दीन रेलवे स्टेशन पहुचे वहाँ पर हमें हमारे ड्राइवर मोहन योगी मिले।10 लोगो का laggage बहुत हो गया था।शाम को हरिद्वार पहुचे होटल जाने की बजाय गंगा आरती करने और हर की पौड़ी में स्नान करने पहुच गए।गंगा मैय्या का पानी बहुत साफ था।10वर्ष पहले आया था तो नही नहाया था इस बार नहाया भी और तैरने लगा तो पॉलिथीन कपड़े पैर में चिपकने लगे।
लोगो को गंगा में प्लास्टिक नही डालना चाहिए।पुराने कपड़े भी वहाँ नही छोड़ने चाहिए।
दिल्ली से हरिद्वार के रूट में सबने गाने गाए ।एक स्पीकर,एक माइक था हमारे पास।हमारे सदस्यों का परिचय भी करवा दूँ।
डॉ हेमा व्यास,मेघना व्यास,और मैं
डॉ सुचिता काले,डॉ रवि काले,तारामती काले,संतोष विन्चुरकर
माधवी बरानिया
सुशीम पगारे और डॉ निलिमा पगारे
हरिद्वार में पहली होटल कृष्णा फ़ूड जंक्शन में डिनर किया और सो गये बहुत थक गए थे।
सुबह नाश्ता करके बरकोट के लिए निकले 205 km है।6 से 7 घण्टे लगते है।
बरकोट में ओक सेडार होटल में रुके।वहाँ हम 2 दिन रुके ।एक सरकारी स्कूल के टीचर ने बनाया है होटल को और उन्ही के स्कूल के बच्चे उस होटल को चला रहे है।2 दिन उन्होंने इतने प्यार से और बढ़िया घर जैसा गर्मागर्म खाना खिलाया ।ब्रेक फ़ास्ट और डिनर
अगले दिन यमनोत्री के लिए निकले हम इस मूड में थे कि 5km तो है 2 घण्टे चढ़ने के और 2 घण्टे उतरने के लगेंगे।सुबह हम 3बजे निकले और 7बजे हम जानकी चट्टी पहुचे गाड़ी में ही खाना खाया हमारे साथ डॉ रवि काले सर की माँ तारामती काले जी थी उनको पिट्टू करवा दिया 6000 में खच्चर का रेट 2500 है चढाई का ।अब चढ़ाई चालू की तो बहुत मजे से डंडे लेकर आगे आगे चल रहे थे हम जेंट्स लोग ।फिर माधवी ने कहा कि आप लोग हम लोगो के साथ चलो ।तो मैंने भी वादा किया कि अब सबसे पीछे चलूंगा ।
1से डेढ़ km पर हेमा को सांस में कुछ तकलीफ सी होने लगी हम लोग 10 मिनट बैठे और फिर एक घोड़े पर हेमा को बिठा दिया।मेरी garmin वाच भी दे दी कि हार्ट रेट देखते रहना।
हम लोग 7.30 पर निकले सुबह और 2 बजे यमनोत्री माता के दर्शन कर पाए।भीड़ बहुत थी 6 से 7 फ़ीट चौड़े ट्रेक पर एक घोड़ा ऊपर से आ रहा था एक नीचे से ऊपर जा रहा है उतनी ही जगह में पेदल यात्री भी जा रहे थे।4 लोग मिलकर एक पालकी बना कर दौड़ लगाते थे।कितने ही लोग घोड़े से गिरे।घोड़े भी फिसल जाते है।एक इंसान को 4 लोग पालकी में ले जाते है।उनकी मजबूरी है।
एक अंकल 70 प्लस के होंगे वो जमीन पर साइड में बैठे थे।उनकी सांस फूल रही थी ।उसके बाद भी पालकी वाले ने उन्हें उतार दिया।पालकी वाले को समझाया कि उनको मत चलाओ उन्होंने पालकी ली ही इसलिए कि वो चल नही सकते है।वो कहने लगा साहब हमारी भी मज़बूरी है अन्यथा हम ये काम नही करते।
रास्ते मे खाने पीने की दुकान है ज्यादा सामान ले जाने की कोई जरूरत नही होती है।हमारे किस्मत अच्छे थे कि बारिश नही आई।
वहाँ हमारे साथ सबसे बड़ी चीटिंग ये हुई कि हर कोई झूठ कह रहा था कि 5km ही है जबकि चढ़ाई 11 km और वापस उतरना भी 11 km है।
वहाँ बताया कि 18 कैची आएगी मतलब 18 मोड़ मिलेंगे और चढ़ते जाओ ।
हर कोई कहता कि 2 km बचा है घंटे भर चढ़ने के बाद वापस कहते कि 2 km और है।
जानकी चट्टी पर 2650 मीटर का एलिवेशन था ऊपर 3150 मीटर 
देखा जाए तो 500 मीटर का एलिवेशन ही था ।परंतु सकड़ा रास्ता और टट्टू वालो और पालकी वालो से मूड खराब हो जाता है।हर मोड़ पर रुकते प्राकृतिक सौंदर्य को निहारते हुए बढ़ते जा रहे थे आखरी 1km में हेमा दिखी वो पैदल आ रही थी ।रास्ते मे सिग्नल नही मिलते है।उसको देखकर जान में जान आयी कि वो स्वस्थ है। माधवी भी बगैर दर्शन करे जा रही थी मैंने कहा कि अपन लोग कोशिश तो करे।भीड़ बहुत थी ।मंदिर तक पहुचे ।दर्शन किये ।गर्म पानी के कुंड में नही गए ।यमनोत्री में पानी इतना बर्फीला था कि 1 min में पैर सुन्न होने लगे।पानी भरा और बाहर निकल आये।वहाँ पर पूरी यमनोत्री में महिलाओं ने साड़ियां नदी को चढ़ाई थी ।शायद हमारी संस्कृति के हिसाब से चुनरी चढ़ाते है।
उतरते समय मे अकेला उतरा बहुत तेजी से सिर्फ 2 ब्रेक लिए साढ़े 5 बजे जानकी चट्टी पहुच गया।जल्दी उतरने का नुकसान ये हुआ कि नीचे आते आते में एग्जॉस्ट भी हो गया और कुछ खाया भी नही।सिर्फ अमूल का दूध पिया और निम्बू पानी।पार्किंग भूल गया कि किस जगह गाड़ी खड़ी है।हेमा ने बताया कि चौहान पार्किंग है।
संतोष काका,सुचेता और माधवी को आने में 7 बज गए ।होटल पहुचे खाना खाया और सो गए ।बहुत थकाने वाली यात्रा थी यमनोत्री की ।सभी ने 21 km का वाक किया।
यमनोत्री का रूट बहुत ही खराब है बरकोट से जानकी चट्टी वाला
हमारे वहाँ से निकलने के बाद अगले दिन एक पन्ना से आये हुए तीर्थ यात्रियों की बस पेड़ से टकरा कर गिर गयी 26 यात्री मारे गए।ड्राइवर 2 दिन से सोया नही था।हमारा ड्राइवर बहुत अच्छा था हमने कह रखा था कि रोज अच्छे से खाना है और सोना है और कोई जल्दी नही।कोई ओवरटेक नही।
उसका जवाब भी जोरदार था कि साहब मेरी 4 लडकिया और एक लड़का है मुझे भी अपनी भी चिंता है।
अगले दिन उत्तरकाशी गए 85 km है बरकोट से।
शाम को उत्तरकाशी के बाबा विश्वनाथ के मंदिर में दर्शन किये।
फिर उत्तरकाशी से गंगोत्री गए 97 km पूरा दिन गाड़ी में शाम को होटल ।गंगोत्री में बताया कि 500 मीटर ही चलना है जबकि 2 km चलना पड़ा।गंगोत्री का पानी बर्फीला था।ग्लेसियर पिघलने से एकदम बर्फ जैसा पानी।
गंगोत्री में पानी का बहाव बहुत तेज होता है।अपनी बहादुरी झाड़ते हुए एक मग लेकर गंगा मैया के किनारे गया और 4 मग पानी डाल लिया सीधा सर पर।एकदम से तारे नजर आने लगे।घाट से ऊपर आया ।सबको बताया फिर कपड़े चेंज करने का सोचने लगा कि इतनी देर में बॉडी एडजस्ट हो गयी वापस मग लेकर गया और सभी को पानी दिया नहाने के लिए।पैर एकदम से ठंडे हो गए थे।निलिमा मैडम ,सुचिता मैडम ,हेमा ,मेघना सभी ने इतने ठंडे पानी मे स्नान किया।आजी 82 yr की है उन्होंने भी आराम से स्नान किया ये श्रद्धा का मामला है।
खैर लाइन में लगे डेढ़ घण्टे में गंगोत्री मन्दिर में दर्शन किये।शाम को होटल आये तो बहुत खांसी होने लगी शायद 15 min चिल्ड पानी मे पैर रखने से या एलर्जी से।
इतनी खांसी थी कि मुझे लगा कि भगवान मुझे केदारनाथ के दर्शन नही होंगे ।इंजरी भी बढ़ गयी थी चलने में भी दर्द हो रहा था।
पिठ्ठू बहुत माथाफोड़ी के बाद 10000 में हुआ सरकारी रेट 7000 है।घोड़े का 2500 ।
7 जून को सुबह 2 बजे उठ गए और 3 .15 पर होटल से निकले 2 घण्टे में सोनप्रयाग पहुच गए ।फिर वहाँ पर बताया कि गाड़ी आगे नही जाएगी।गौरीकुंड तक शटल चलती है ।सोनप्रयाग से गौरीकुंड 5 km के 50 रुपये प्रतिव्यक्ति।स्कार्पियो से।

उसके लिए 2 घण्टे की 2km लंबी लाइन थी ।जैसे तैसे गौरीकुंड पहुचे।फिर हम सब ने तय किया कि आजी को पिठ्ठू करवा देंगे ।माधवी को भी टट्टू करवा देंगे।
बाकी लोगो ने सुबह 7 बजे से चलना चालू किया।मैं ,मेघना,और सुशीम साथ साथ चल रहे थे।
पीछे संतोष काका और डॉ रवि और उनके पीछे हेमा,नीलिमा,और सुचिता थी।
हमने कई शार्ट कट वापरें।शार्ट कट से 100 -100मीटर के बड़े रास्ते 20 से 30 मीटर में हो जाते और घोड़ो पालकी वालो से बचाव हो जाता है।काफी ट्रैकिंग हो गयी ।उसमे पैर स्लिप होने का भी डर होता हैऔर जांघो में दर्द भी होता है।
हमने कई शार्ट कट वापरें।
1800 मीटर का एलिवेशन है सोनप्रयाग में केदारनाथ में 3500 मीटर मतलब 1700 मीटर की चढ़ाई
On the up run they appear in the following order: Cowies Hill, Fields Hill, Botha's Hill, Inchanga, and Polly Shortts. The highest point of the race, at 2,850 feet (870 m) above sea level, is situated near the Umlaas Road interchange.
कामरेड मैराथन में 870 मीटर का एलिवेशन होता है।कामरेड मैराथन में 90 km करना होता है 12घण्टे में जबकि हमने 12 घण्टे में 24 km ही किया ।कोई तुलना नही है।बस समझने के लिए की कितना ज्यादा एलिवेशन है।
शाम 7 बजे पहुचे ।पूरी तरह थक गए थे फिर दर्शन की लाइन में लग गए हमारे किस्मत अच्छे थे कि बारिश नही आई।वहाँ एक टी शर्ट में ही पहुच गया 2 घण्टे की लाइन के बाद बाबा केदारनाथ जी दर्शन हुए हम धन्य हो गए।2 माह पूर्व कोई कार्यक्रम नही था चारधाम का बस बाबा ने ही हमे बुलाया इसलिए हम पहुच गए कितनी ही तकलीफों के बावजूद भी।माधवी और आजी पहले ही आ गयी थी।बीकानेर हाउस में एक डोरमेट्री दी हमे 10 लोग एक कमरे में या हॉल में सोए।खिचड़ी कड़ी खाकर सो गए मुझे बिस्तर में आकर ठंड लगने लगी जीन्स शर्ट जैकेट पहनकर ही सो गया।
सुबह 6 बजे उठे हम सब लोग और तैयार होकर मंदिर आ गए संतोष काका पूर्व जेलर और एस पी रहे थे उनके कारण हमारे vip दर्शन हो गए ।फिर 7 से 10 तक वही मन्दिर में रहे।सब लोगो ने फ़ोटो खिंचे।प्रसाद लिया।
हमने आलू पराठा खाया।और 10.30 से नीचे उतरना चालू किया।रास्ते मे मैग्गी खाई।समोसा भी खाया और ध्यान रखा कि उतरना चढ़ने से भी कठिन है क्योंकि घुटने पर डायरेक्ट लोड आता है।एक से डेढ़ km का शार्ट कट लिया।बीच मे हल्की सी बूंदाबांदी भी हुई।हमारी टीम एक जैसी ही थी मेरे साथ मेघना और सुशीम थे ।हमने हमारे सारे बैग पिट्टू पर रख दिये थे।उसका 6000 चार्ज लगा परंतु उससे हमारे हाथ फ्री हो गए ।
7 बजे गौरीकुंड पहुचे एक होटल में खाना खाया।और 7.30 पर पिट्टू के पास पहुचे वो सामान लेकर पहले ही आ गया था।पिठ्ठू वाले अपना आइडेंटिटी कार्ड आपको सौप देते है जिससे आपको भरोसा भी हो और कोई सामान लेकर या व्यक्ति को लेकर कही चला जाये तो आप रिपोर्ट भी कर सकते हो
गौरीकुंड पर मेघना ,सुशीम और में 7.30शाम को पहुचे।
वहाँ पिट्टू वाले को उसका 10000 पेमेंट किया उसका आइडेंटिटी कार्ड वापस किया।दूसरा पिट्टू वाला सारा luggage लाया था उसे भी 6000 पूरा पेमेंट करके बिदा किया।
उन्होंने बताया कि शटल गौरीकुंड से सोनप्रयाग के लिए 2 से 3 घण्टे की 2 km की लाइन है।हमारे तो होश उड़ गए ।हमारे पास पिट्टू वाला लगेज था 6 से 7 बैग ।हमने प्लान किया कि लाइन में तो लगे में और पगारे जी लाइन में लगे मेघना को कहा कि आजी को लेकर आओ धीरे धीरे।थोड़ी देर बाद सोचा कि मेघना को और आजी को भी आगे लाइन में ले आता हूं।अंधेरा था लाइन में चेहरे पहचान नही आ रहे थे।आवाज लगाता हुआ बढ़ रहा था मेघना मेघना उसने देख लिया वो आजी के साथ थी पुलिस ने परमिशन दी थी कि बुजुर्ग है इसलिए आगे चले जाएं।हमे आजी के कारण लाइन में खड़ा नही रहना पड़ा।एक शटल में बैठ गए हम चारो ।सोनप्रयाग में उतरे तो बताया कि यहाँ से डेढ़ km दूर सीतापुर पार्किंग है जहाँ हमारी टेम्पो ट्रेवलर खड़ी थी।
मैंने एक बड़ा बैग जिसमे 6 से 7 बैग थे उसको पीठ पर लिया सुशीम ने भी 3 से 4 बैग ले लिए 600 -700मीटर चलने के बाद हमने पुलिस से हेल्प मांगी तो उन्होंने कहा कि कोई गाड़ी जा रही हो तो उसमें बिठा देंगे।फिर हमें एक स्कोर्पियो मिल गयी वो 500 रूपये में छोड़ने को तैयार हो गया।अब समस्या ये थी कि इतनी बड़ी पार्किंग में गाड़ी कैसे ढूंढेंगे।ड्राइवर को कहा कि पैदल आओ गेट तक और हमारे साथ चलो ।इस प्रकार जैसे ही हम हमारी टेम्पो ट्रेवलर में पहुचे सांस में सांस आयी।
अभी बाकी 6 लोग पीछे थे ।वो 11 बजे तक टेम्पो ट्रेवलर में आये।हेमा,निलिमा,माधवी की तबियत खराब लग रही थी।इन सब लोगो ने खाना नही खाया था और देर भी बहुत हो गयी थी सभी exhausted थे।
हमारा होटल गुप्तकाशी में हिमालयन आर्किड था परंतु रूम खाली नही होने पर हमें केदार वैली रिसोर्ट में दिया था ।रात को 12 बजे पूछा कि खाना मिलेगा क्या होटेलमे रात को तो बताया कि आपकी एक दिन की बुकिंग थी अब आपको हिमालयन आर्किड जाना होगा।रात को हमने luggage शिफ्ट किया और खाना खाया और सो गए ।हिमालयन आर्किड अच्छी होटल है।सुबह हमे गुप्तकाशी से बद्रीनाथ के लिए निकलना था।
मेडिकल से ascoril exp ली और कॉम्बिफ्लेम ली ।सभी को खांसी हो रही थी।
ओम कुटीर होटल में रुके बद्रीनाथ में।बहुत अच्छा खाना खिलाया।
सुबह दर्शन करने निकले 10 .30 बजे ।पहले कोशिश की की vip दर्शन हो जाये परंतु आजी,संतोष काका और सुशीम को छूट दे दी उनके vip दर्शन हो गए बाकी हम सब लाइन में लग गए 4 घण्टे में नंबर आया भगवान बद्रीनाथ के दर्शन बहुत अच्छे से हो गए।उनको लाइव दर्शन के लिए लेड टीवी लगाना चाहिए।
200 km के लिए 7 से 8 घण्टे लगना थे।सुबह नाश्ता करके 9.30 पर निकल गए ।शाम को बद्रीनाथ पहुचे बारिश भी शुरू हो गयी थी और ठंड भी बढ़ गयी थी ।सुशीम की तबियत अच्छी नही थी उन्हें बुखार भी आया और ठंड भी बहुत लग रही थी।बाकी सबकी तबियत भी बहुत अच्छी नही थी।


मैं मेरी जिंदगी में कभी किसी मंदिर में इतनी देर तक लाइन में नही लगा।खजराना मन्दिर भी कभी बुधवार को नही गया।परंतु चार धाम यात्रा में 2 से 4 घण्टे की लाइन में रुककर दर्शन किये।
शाम को 5 बजे बिरही के लिए निकले और 9 बजे तपोवन रिसोर्ट पहुचे।खाना खाया और जाकर सो गए बहुत सुंदर रिसोर्ट है।
सुबह जल्दी उठ गया नमक के पानी के गरारे किये,चाय बनाकर पी ।रूम में ही चाय बनाने का सामान था।8 बजे नाश्ता किया आलू परांठा दही ।
11बजे निकले तपोवन रिसोर्ट से 8 बजे शाम को हरिद्वार पहुचे।कृष्णा फ़ूड जंक्शन में।सभी होटल अच्छी मिली ।
एक भागीरथी पैलेस को छोड़कर।
हरिद्वार सुबह जल्दी उठ कर गंगा आरती के लिए पहुचे 5 बजे आरती हो चुकी थी ।हम 6.30 पर पहुचे थे बहुत भीड़ थी सुबह भी।कल रात को सुशीम ने कहा था कि फ्लाइट करवा दो तो उनकी फ्लाइट रात को ही बुक कर दी थी।उनकी तबियत ठीक नही हो रही थी।
दोपहर को हम साढ़े 3 बजे अक्षरधाम पहुच गए थे।डॉ काले के भाई और भाभी वहाँ आने वाले थे।
सुचेता मैडम को तेज बुखार आ गया था ।स्टेशन पर ही ।बाकी हम सब भी खांस ही रहे थे।सुबह हुई तो पता चला कि गाड़ी 2 घण्टे लेट चल रही है।साढ़े 3 बजे इन्दौर पहुचे चेतन ,ध्रुवी,बड़े भाभी,संगीता भाभी,और पप्पी भाभी हार लेकर रेलवे स्टेशन आये थे।सभी ने फ़ोटो खिंचाए।रवि काले जी से बिदाई की झप्पी ली ।
हम लोग अक्षरधाम के मेट्रो स्टेशन के माल में हल्दीराम के एक बड़े आउटलेट में बैठ गए और सबने वहाँ बैठकर कुछ खाना खाया और फिर साढ़े 5 बजे रेलवे स्टेशन पहुच गए।ट्रैन का समय 8 .15 था ट्रैन डेढ़ घण्टा लेट थी 3 से 4 घण्टे स्टेशन पर गर्मी में हम लोग पक गए।सामान इतना था कि हम वेटिंग रूम में भी नही जा सके गाड़ी आनेवाली थी प्लेटफॉर्म no 5 पर और प्लेटफॉर्म नंबर एक पर वेटिंग रूम था।
अब मेरी राय है कि जिन्हें पैदल पैदल ही केदारनाथ करना है उन्हें रात में यात्रा करनी चाहिए ।शाम को 4 या 5 बजे चालू करो सुबह 5 बजे खत्म ।रात को यात्रा करने का फायदा यह रहेगा कि भीड़ नही मिलेगी ।टट्टू वाले,पिट्ठू वाले,और पालकी वाले नही मिलेंगे।परंतु प्राकृतिक सौंदर्य को देखने से वंचित रह जाओगे।
दूसरी राय जिनको लगता है कि वो नही चढ़ सकते है वो हेलीकॉप्टर बुक कर ले।परंतु हेलीकॉप्टर 8 मिनट में पहुचा देगा।यात्रा का असली आनंद पैदल चल कर करने में ही है।
हम 10 लोगो मे से 2 को हॉस्पिटल में भर्ती होना पड़ा और बाकी 8 को भी सर्दी खासी आज तारीख 19 जून तक बनी हुई है।
खांसी का कारण ओवर exersion या थकान ही है।36 घण्टे में 20 घण्टे चढ़ाई और उतराई की 48 km की।
जय केदारनाथ जी की
जय बद्रीनाथ जी की
 जय गंगोत्री मैया की

Friday, April 1, 2022

42 nd full marathon 27 march 2022

42 nd full marathon in 9 yrs
27 मार्च को मुझे idbi दिल्ली की मैराथन दौड़ना थी ।परंतु इंजरी के कारण निर्णय लिया कि इंदौर में ही दौडूंगा।मेरा टारगेट 4.30 का था idbi दिल्ली का फॉर्म भरा जब क्योकि मुझे कामरेड मैराथन के लिए क्वालीफाई करना था।
परंतु 29 nov को जब 12 घण्टे की रन की थी उस समय से ही मुझे लेफ्ट फुट में tendoachilis में मोच की शंका हो गयी थी ।मैंने garmin की वर्चुअल ट्रेनिंग sub 2 के लिए ली थी 4 माह पूरी ईमानदारी से ।उसमे वीक में 2 बार और कभी कभी 3 बार 800 मीटर के इंटरवल ट्रेनिंग थी।उससे ही मुझे इंजरी हुई।इंटरवल ट्रेनिंग वीक में एक बार ही करनी चाहिए।
इंजरी का कारण
too early
too fast
ही होता है ज्यादातर बार।
करीब 45 दिन तक मैंने साइकिलिंग की और दौड़ को पूरा आराम दिया।रिकवरी के लिए रेस्ट से बढ़कर कोई चीज नही है।साइकिलिंग और स्विमिंग बहुत अच्छी होती है इंजरी टाइम में।
मैं बगैर दौड़ के बहुत परेशान था कि क्या में अब कभी नही दौड़ पाऊंगा क्या।इवन सपने में एक बार 8 km रन किया  तो सपने में ही खुश हो गया कि मैं दौड़ पा रहा हूँ।
जब नही दौड़ पा रहा था उस समय भगवान से यही मांग रहा था कि भगवान भले ही 10 के पेस में जॉगिंग करवा दे जिंदगी पर jogg करके ही खुश हो जाऊंगा।
वैसे मुझे पूरा विश्वास था कि रनिंग में इंजरी होना ही है जब भी आप टारगेट रखोगे तो।
टारगेट होता है तो आप थोड़ा ज्यादा प्रयास करते है और उसके कारण ही इंजरी होती है।
मेरे दोस्त डॉ गुरुवचन टुटेजा हड्डी रोग विशेषज्ञ से मिला।उन्होंने एग्जामिनेशन करके बताया कि इंजरी नही है विटामिन b12 करवाओ और विटामिन डी की जांच कराओ।
जांच करवाई तो vitamin b12 80 आया जो 200 से 1000 होता है।
साथ मे b12 के 5 इन्जेक्शन भी दिए और कुछ टैबलेट भी दी।
2 इन्जेक्शन लगाने के बाद ही सुधार होने लगा और में 21 km दौड़ लिया उसके एक संडे बाद एक बार 21 और दौड़ लिया
20 मार्च को भी 17 दौड़ लिया तो फिर सोचा कि इंदौर में ही साढ़े 4 नही तो 6 घण्टे में ही 42 km रन करूंगा।
सामान्यत में सुपर कॉरिडोर या पीटीसी या brts पर 42करता हूं।परंतु डॉ जितेंद्र बरानिया ने कहा कि  मलहरश्रम पर सुबह 4 बजे से दौड़ेंगे।उनके कारण ही पिछले 8 वर्षों बाद मैने मलहरश्रम पर 42 km की रन की ।शुरू में जब दौड़ना चालू किया था 2013 अक्टूबर को जब वहां dec 2013 को 2 संडे 42km की रन की थी।
एक और बात इस बार asics gt 2000 शूज के  साथ 42 की।पिछले 5 से 6 वर्ष में पहली बार है कि मैने शूज के साथ 42 km की रन की अन्यथा में  विब्राम,लूना सैंडल,बेयरफुट,पैरो  पर dynaplast के पट्टे लगाकर ही 42 दौड़ता था।
इसमें राजेश पोरवाल जी का काफी साथ रहा उन्होंने अपने gt2000 शूज ट्रायल के लिए मुझे दिए थे।
27 तारीख के लिए मस्तानसिंघ राजपूत जी ,देवराज पाटीदार जी ने हाँ कर दी थी।फिर शिशुपाल यादव और राजेश खण्डेलवाल भी अपनी पहली मैराथन के लिए आने वाले थे।
सुबह 2.40 पर उठा और एक बेसन का चीला और कॉफ़ी पी कर घर से 3.35 पर निकल गया ।मलहरश्रम में राजपूत जी,पाटीदार जी और शिशुपाल और प्रिंस दुबे  पहले से ही आ गए थे।हम सब ने फ़ोटो लिए और ग्रुप में पोस्ट कर दिए।5 रनर्स अगर एक साथ 42 दौड़ना चालू करे तो सबको एक दूसरे से प्रेरणा मिलती है और फिर दौड़ते रहते है।
10 बजे मेरी दौड़ खत्म हुई ।9 बजे से 10 बजे के समय धूप बहुत तेज हो गयी थी पारस जैन ने पूरा साथ दिया और 42 km रन करवा दी।उसके पहले संजय तहिलियानी मेरे लिए पानी लेकर आये,अखिलेश जैन और गुरुदत्त शर्मा भी आ गए थे ।एक इवेंट जैसा लग रहा था।6 लीटर पानी,6 इलेक्ट्रोलाइट के कैप्सूल,15 खजूर,1 केला,8 फ़ास्ट एंड अप की गोली ली।पल्स की 6 से 7 tab ली
घर आकर केला,ढूध,और whey प्रोटीन का शेक लिया।2 बजे एक शादी अटेंड की रात को रिसेप्शन भी अटेंड किया ।ये इसलिए बता रहा हु की स्लो रन करने से रिकवरी भी फ़ास्ट होती है और इंजरी से भी बचते है।मलहरश्रम में रन करने का फायदा ये रहता है कि हर 3 km पर क्लोक वाइज और एन्टी क्लोक वाइज रन जब करते है तो हम रनर्स एक दूसरे को देखते हुए मोटीवेट होते है।घर से जब सुबह निकला उस समय मेरा वजन 73 था और 42 करके जब वापस आया 10 बजे तो भी 73 था।कहने का मतलब ये है कि अभी गर्मी के सीजन में रनिंग में डिहाइड्रेशन का खतरा बहुत होता है 6 लीटर पानी पसीने से और अपनी सांस के साथ बाहर निकला
आप सबका धन्यवाद इसे पढ़ने के लिए।मेरे बाकी ब्लॉग भी आप पढ़ सकते है ।इस लिंक पर जाकर
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Thursday, November 25, 2021

41 st फुल मैराथन और 12 घण्टे की चौथी अल्ट्रा


21 nov 2021 की 4 th 12 hr रन और मेरी 41 st फुल मैराथन
ये ब्लॉग लिखने का एक ही मकसद है कि अपनी गलतियों से हम सबक ले।गलतियां तो होनी ही है।
कुछ नए नए एक्सपेरिमेंट करने जाओगे तो अच्छे और बुरे अनुभव तो होंगे ही।
इस बार मैंने 12 घण्टे  रन की कोई तैयारी नही की थी ।15 अगस्त को 42 km रन किया था।उसके बाद कोई भी 25km से बड़ा रन नही किया था ।ये सबसे बड़ी गलती थी ।मेरा वीकली माइलेज 20 से 25 km था ।क्योंकि में garmin कोच की ट्रेनिंग ले रहा था उसमें 3 दिन ही वर्कआउट मिलता था।
खैर ये मेरा दुस्साहस था की बगैर प्रैक्टिस के 80 kmरन करने का टारगेट ले लिया।
इस बार मैंने सोचा कि हाइड्रेशन बैग लेकर रन करू ।2 लीटर पानी मे 8 tab fastandup की डाल ली।और साल्टेड रोस्टेड बादाम पॉकेट में रख लिए।और अमूल चीज क्यूब।
2019 में मैंने शुरू से ही 300 रन और 100 मीटर वाक का प्लान किया था और आखिरी के 4 घण्टो में 300 मीटर वाक और 100 मीटर रन।उसके कारण 76 km रन हो गयी थी।
इस बार पानी भी था राशन भी था तो 20 km तक नॉन स्टॉप दौड़ लिया।।जबकि 12 घण्टे की रन में रन वाक स्ट्रेटेजी ही सही रहती है।
बादाम और अमूल चीज के कारण पेट गड़बड़ होने लगा  और कम से कम 5 बार टॉयलेट जाना पड़ा।ये भी एक बहुत बड़ी गलती थी ।सभी एक्सपर्ट यही कहते है कि इवेंट में नया कुछ भी try मत करो ।ये रूल ही सही है ।मैंने प्रैक्टिस में कभी रोस्टेड बादाम और अमूल चीज क्यूब नही लिए थे।
एक और ब्लंडर रेडबुल और कोक का लेना।इनसे स्टिमुलेशन तो मिलता है परंतु इससे diuresis होती है।
बार बार पेशाब आना ।इससे नुकसान दो तरफा होता है एक तरफ आपको dehyration हो रहा है और पेशाब hypertonic सोलुशन के कारण बार बार और क्लियर आती है।उससे false sense of security लगती है कि हमे पानी की कमी नही है जबकि ये  ड्रिंक dehydration कराते है।12 घण्टे रन के बाद ब्लड टेस्ट करवाया था उसमें भी सोडियम 131 और पोटैशियम 6 आया।

ये पैराग्राफ 27 nov 2021 को जोड़ रहा हु।आज वापस ब्लड टेस्ट करवाया 

serum cpk 3300 से घटकर आज 140 नार्मल रेंज में आ गया । creatinine भी नार्मल ।डॉ अरुण अग्रवाल सर और डॉ हरिप्रसाद जी ने चिंता जाहिर की थी इसलिए आज वापस जांच करवाई।
शरीर मे नमक की कमी हुई कोक और रेडबुल से कभी नही पीना चाहिए।
हमे उपमा,पोहा,खिचड़ी,सैंडविच,केला ,चिप्स,खजूर पर ही निर्भर  रहना चाहिए।
साढ़े 10 बजे से 4 बजे तक धूप इतनी तेज थी कि दौड़ते नही बन रहा था।सभी volunteers के  कारण ही दौड़ पूरी हो पाई।1 बजे से 2 बजे जब जोश खत्म हो रहा था अजय झांग जी ने माइक संभाला और फिर रनिंग कमेंट्री करते रहै और डांस भी करते रहे।जिससे हम 12 घण्टो वालो का जोश बना रहा।इवेंट में 12 बजे के बाद सिर्फ 25 रनर ही बचे थे ट्रेक पर।वैसे समय पर हम 25 लोगो के लिए पूरी टीम लगी हुई थी।
4 से 5 में जब एलीट रनर आये तो मजा आ गया मनीष गौड़,शिवानी,और राजेश पोरवाल जी को लाइव देखने मे आनंद आ गया।आखिरी के घण्टे में डॉ टुटेजा आ गया उसने और मेघना और हेमा ने आखिरी घण्टे की रन को पूरा करवा दिया ।
अखिलेश,ज्योतिर,संजय तहिलियानी लगातार पूछ रहे थे कुछ चाहिए तो नही न।
सुरेश लाहोटी जी ने बहुत सेवा की आइस वाले स्पंज से गिला किया ।
राहुल भी लगातार ध्यान रख रहा था।सभी लोगो के प्रोत्साहन के कारण ही 12 घण्टे की रन होती है।
आखिरी के दो km का पेस 5.59 और 5.21 रहा ।फिनिश हमेशा स्ट्रांग करना चाहिए वो किया।पोडियम पर जाकर ट्रॉफी ली जय श्रीराम का उद्घोष किया सभी ने ।मैंने भी जय श्रीरामजी की कहा।मैं एग्जॉस्ट हो चुका था हेमा को कहा कि कार ले आओ जल्दी से घर चलना है जब तक हेमा कार लेकर आई में इतना disoriented हो चुका था कि गेट किधर है कैसे बाहर जाना है।ये एक 2 मिनट रहा फिर बाहर आ गया बाहर कंक्रीट गिट्टी पड़ी थी मै बेयरफुट था तो कुछ रनर ने कहा कि आप को उठा लेते है मैंने कहा कि बेयरफुट वाले को ये सब झेलना ही पड़ता है ।20 मिनट में घर पहुचा जैसे ही कपड़े चेंज किये  बहुत तेज ठंड लगने लगी।बगैर नहाए 2 घण्टे बिस्तर में रहा जब ठंड कम हुई तब थोड़ा सा ढूध पिया ।थकान के कारण नींद लग गयी ।सुबह 5 बजे  अच्छे से नाश्ता किया ।
2 दिन तकलीफ हुई ।काम पर तो सोमवार को ही चला गया था।
बुधवार को कल 24 km साईकल चलाई आज गुरुवार को पूर्णतया स्वस्थ हो गया हूं।
hr भी अब नार्मल हो गयी है।सीरम cpk की जांच करवाई थी जो 100 के आसपास होनी चाहिए वो 3000 आयी।सीरम क्रिएटिनिन भी 1.5 आया।
पोटैशियम 6 और सोडियम 131
मुझे 2019 की अल्ट्रा के बाद भी ये लक्षण आये थे।इसलिए इस बार सोच रखा था कि इवेंट के बाद ब्लड टेस्ट करवाऊंगा।
हमे मैराथन और अल्ट्रा को कभी कभार ही दौड़ना चाहिए।

2017 में पहली बार शिवाजी पार्क की  अल्ट्रा मैराथन में भाग लिया था उस समय 68 km रन किया था।उसके बाद 2018 और 2019 कि इंदौर में 15 अगस्त की तिरंगा रन में भाग लिया था 68 और 76 km रन की थी 12 घण्टे में।इस बार रन में मुझे आदरणीय स्व डॉ बी आर पारिख सर बहुत याद आये।2019 में सर ने ही सभी फ्लैग ऑफ किये थे।

साल में एक अल्ट्रा एक फुल मैराथन बहुत होती है।
ये भी advisable नही है।फिटनेस के लिए 20 मिनट की जॉगिंग ही बहुत है।
मेरक मकसद होता है कि हम दौड़ेंगे तो लोग हमें देखकर थोड़ा  बहुत तो दौड़ ले और स्वस्थ रहे।
धन्यवाद ।इतना बड़ा ब्लॉग पढ़ने के लिए
dryvyas@gmail.com
9826210372

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Sunday, September 26, 2021

barefoot running

19 sept
बेयरफुट रनिंग क्यो
मैं पिछले 6 वर्षो से बेयरफुट रनिंग कर रहा हु।बेयरफुट रनिंग का चस्का मुझे मेरी बार बार की इंजरी के बाद लगा जब हम davv में दौड़ते थे अवनीश उपाध्याय जी मेरे गुरु रहे है।पिछले एक डेढ़ वर्ष से शूज के साथ भी दौड़ना चालू किया है परंतु वो मजा नही है रनिंग में जो बेयरफुट में है।
उसका उदाहरण देने के लिए ही आज ब्लॉग लिख रहा हु।पिछले रविवार भी मुझे 21 km दौड़ना था आज भी 21 ही दौड़ना था ।पिछले रविवार को शूज के साथ दौड़ा आज बेयरफुट ।दोनों दिन मैंने हार्ट रेट और स्पीड पर फोकस नही किया और एलएसडी जैसा ही दौड़ा ।पिछले रविवार को शूज के साथ मुझे 5 से 7 km के बाद रन वाक करना पड़ा और एवरेज हार्ट रेट 154 आयी आज नॉनस्टॉप इजी रन किया और एवरेज हार्ट रेट 144 आयी आज 91%रन जोन 3 में दौड़ा जबकि लास्ट संडे 75%जोन 4 में दौड़ लगाई।करीब 7%का अंतर आया हार्ट रेट में ।
how you feel की बात करे तो पिछले संडे बहुत बुरी हालत थी रन वाक की मतलब स्मूथ रन नही हो पाया था।तो दिन भर कम्फ़र्टेबल नही रहा।दर्द होता रहा ।मैं काफी दुखी हो गया था कि अब 21 नही होगा और लांग डिस्टेंस रनिंग से नमस्ते करने का वक्त आ गया है।आज सुबह बेयरफुट करने का मन पहले ही बना लिया था।मुझे बहुत अच्छा फील होता है।ठीक है रास्ते मे कंकर पत्थर गढ़ते है पर क्या करे रनिंग तो नही छोड़ सकते है।
इसमें एक बात और जोड़ना चाहूंगा कि लास्ट संडे 500 ml की पानी की 3 बोटल ली थी एयरपोर्ट,छोटा बांगड़दा से ।उसमे इलेक्ट्रोलाइट नही था और निम्बू भी नही।
आज घर पर इलेक्ट्रोलाइट और निम्बू की 2 लीटर की बोतल रखी थी ।11 km दौड़ने के बाद घर आकर ब्रेक लिया और पानी पिया और फिर 15 वी बटालियन और मलहरश्रम पर 500 ml पानी लिया ।आज पूरे 21 km nose breathing की ।मतलब बहुत कम्फ़र्टेबल था ।
बेयरफुट रनिंग की किसी को में राय नही देता हूं।परंतु जो बार बार injure होते है उन्हें बेयरफुट के बारे में जरूर सोचना चाहिए।
वैसे बेयरफुट रनिंग के पहले मैंने असिक्स कियानो और दूसरे सभी शूज पहने है।लूना सैंडल,विब्राम,स्किनर्स,आदि वापर चुका हूं।
dynaplast के पट्टे भी लगाकर रन की है।
स्किनर्स और dynaplast सबसे बढिया है।बिल्कुल कुछ न पहन कर दौड़ो तो उससे अच्छा तो कुछ भी नही है।ये मेरे अनुभव है ।पिछले 5 से 6 वर्षो के बेयरफुट रनिंग के बारे में।
डॉ योगेन्द्र व्यास
शिशु रोग विशेषज्ञ
dryvyas@gmail.com
9826210372

Wednesday, August 18, 2021

58 वर्ष पर 40 वी फुल मैराथन

40 th फुल मैराथन 15 अगस्त 2021
ये ब्लॉग में इसलिए लिख रहा हु की मैराथन दौड़ने वालों को इससे कुछ भी मदद मिल सके।58 वर्ष की उम्र में 40 मैराथन 8 वर्ष में कम नही होती है।अपने अनुभव को शेयर करना ही चाहिए।
15 अगस्त की रन के लिए वर्चुअल रन का फॉर्म भर दिया था 1 माह पूर्व।
जैसे ही आप फॉर्म भरते हो किसी भी मैराथन के लिए उसी समय से आपका मन तैयार होने लगता है।13 अगस्त को फेसबुक,इंस्टाग्राम,व्हाट्सएप पर भी कमिट कर दिया था कि सुबह 5 बजे नेहरू स्टेडियम से दौड़ शुरू करूँगा पहले पूरा brts 18 km का और फिर पीटीसी में।
14 तारीख को थोड़ा एक्स्ट्रा खाना भी खाया और 1 लीटर इलेक्ट्रोल का पानी भी पिया।
सुबह 3.30 पर उठ गया।अच्छी नींद आयी।4.30 पर नेहरू स्टेडियम पहुच गया।बॉबी छाबड़ा जी मिले उनके साथ सेल्फी ली ।और 4.40 पर दौड़ शुरू कर दी।5 बजे डॉ श्याम झा ने और शैलेंद्र जोशी जी ने आने का कहा था ।इन्तेजार करते हुए रन करता रहा।स्पीड नही बन रही थी उसकी मुझे चिंता भी नही थी।
पिछले 6 दिन में 14 km ही दौड़ा था,एक माह से 21 भी नही किया था।देश के लिए हर 15 अगस्त को दौड़ना है यही जज्बा था बस 42 करना है ।
श्याम झा और शैलेन्द्र जी 5.20 तक आये जब तक 5 km रन हो चुका था।पेस स्लो था।विजय नगर तक गया वहाँ से पलटा तो थोड़ी देर बाद डॉ गोखले सर मिल गए ।डॉ गोखले सर 64 yrs के है और हम दोनों ने बहुत सी मैराथन साथ मे की है।उनके साथ बहुत अच्छी tunning होती है मेरी।
12 km से 42 km तक सर का पूरा साथ था।हमारे काफी रनर साथी भी मिलते रहे सबके साथ सेल्फी लेते हुए हमारा भी जोश बढ़ रहा था।
42 आजकल में किसी को करने की राय नही देता हूं।ये फिजियोलॉजिकल नही है।साल में एक बार ही करता हु में अब।पहले हर माह करता था।अभी स्ट्रक्चर्ड ट्रेनिंग ले रहा हु garmin connect से।
24 km हुआ जब हम brts से वापस आये ।पूरी तरह से थक चुके थे।मुकेश खंडेलवाल,सुनील तिवारी,मंजीत आदि भी 42 दौड़ रहे थे पीटीसी पर उन लोगो ने जल्दी चालू कर दिया था 4 बजे के आसपास जो कि समझदारी का काम था हमारी मैराथन 6 घण्टे 15 min में हुए पौने 11 बजे।जबकि उनकी 9.30 तक ही खत्म हो गयी थी।मैराथन इसीलिए जल्दी शुरू करना चाहिए।fastandup की टेबलेट पानी मे डाल कर लाया था 4 लीटर के आसपास लिक्विड लिया उसमे बॉबी छाबड़ा जी ने और विवेक सिंघल जी ने भरपूर गन्ने का रस 4 गिलास पिलाया।अलका झा मैडम ने छाछ दी एनेरजल का पैकेट डॉ श्याम झा ने दिया।गोखले सर को 30 ही करना था वो मुझे कम्फ़र्टेबल नही लग रहे थे मैंने सर से 2 से 3 बार कहा कि सर आप मत कीजिये 42 परंतु सर की दृढ़ इच्छाशक्ति को में मान गया ।उन्होंने 42 km रन पूरी की सिर्फ मुझे साथ देने के लिए ।ये मैराथन सर को डेडिकेटेड है।मेरे सीनियर और मेरे बहुत अच्छे दोस्त।मुझे गर्व है सर पर।
दौड़ फिनिश हुई पौने 11 बजे विवेक सिंघल जी आ गए 2 बार के कामरेड चैंपियन उन्होंने बहुत प्यार से हमे गन्ने का रस पिलाया फिर में मैडल लेकर आया था जो कि पहले से ही कॉरियर से आ गए थे ।एक गोखले सर से और एक विवेक जी से मैडल पहना।
इवेंट जैसी फीलिंग हो गयी।
अब बात करते है स्ट्रेचिंग की गोखले सर और मैने स्ट्रेचिंग नही की ।31 km शूज के साथ दौड़ा और आखिरी के 11 km बेयरफुट।पैर के नाखूनों में बहुत दर्द होने लगा था।निप्पल पर पट्टी लगाकर आया था एक पट्टी गिर गयी तो ब्लीड करने लगा ।टी शर्ट के ऊपर से ब्लड दिख रहा था।टी शर्ट के फ्रिक्शन से ब्लीडिंग होती है।या तो वेसिलीन लगाए या पट्टी लगा दे डॉक्टर्स टेप।
घर आकर पहले नहाया फिर 30 ग्राम प्रोटीन whey 300 ml ढूध में लिया।फिर पोहा खाया ।
फिर जमीन पर लेटकर सो गया और 1 घण्टे पैर को छत की तरफ करके लेटा।थोड़ी चाल बिगड़ गयी थी।मैराथन के बाद ये सामान्य है ।4 बजे कॉफी पी तेल मालिश की फोम रोलर से मसाज किया ।पैरों को ठंडे  पानी मे डालकर रखा।
इन सब चीजों का फायदा ये हुआ कि शाम तक चल फिर पा रहा था नॉर्मली।अगले दिन सुबह 5 km वॉक किया तो muscle में soreness थी पुशअप और squat लगाए।मुझे लग रहा था कि रिकवरी हो गयी है परंतु मेरे क्लिनिक से 16 तारीख को सुबह और शाम को उतर रहा था तो thigh की muscle बता रही थी कि अभी भी आप को आराम की जरूरत है।17 अगस्त को 14 km slow साईकल राइड की पहले 2 km में तो पैर पूरे जाम थे।
जो कहते है कि 42 km मतलब 26 माइल्स अगर आप दौड़ते हो तो आपको 26 दिन आराम करना चाहिए।
आज 18 अगस्त को garmin coach के नियम से मुझे 800 मीटर के 6 इंटरवल्स करने थे 5.50 के पेस में 3 min रिकवरी वाक के साथ ।
मुझे मालूम था कि अभी रिकवरी नही हुई है इसलिए आराम से पहले वार्मअप किया पहला इंटरवल 6.32 में हुआ मुझे खुशी हुई कि कम से कम् में दौड़ तो पा रहा हु।जबकि घर से वाक का टारगेट लेकर निकला था बाद के इंटरवल्स ये रहे,6.00,6.08,5.45,5.49,4.58 
आखिरी इंटरवल 4.58 पेस का रहा कहने का मतलब ये है कि अपनी बॉडी को समझते हुए धीरे धीरे रिकवरी करे।
42 km की रिकवरी के लिए ही ये ब्लॉग लिखा
DR YOGENDRA VYAS
MD( PED)
dryvyas@rediffmail.com
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Thursday, June 17, 2021

कोरोना के बाद पहली 21 km की रन

आज का ब्लॉग लिखने का मूल उद्देश्य 2 है एक तो कोरोना के बाद रिकवरी कैसे करे
दूसरा मन को कैसे बेवकूफ बना कर दौड़े।
कोरोना के बाद सामान्य लोगो के लिए राय यह है कि वे आखिरी लक्षण जैसे बुखार या खांसी के खत्म होने के कम से कम 2 माह बाद वर्कआउट चालू करे ।मुझे 11 अप्रैल को हल्की सी खांसी थी बुखार बिल्कुल नही आया था।वीकनेस भी नही थी 13 को रैपिड एंटीजन करवाया  वो नेगेटिव आया ।फिर बिटिया की जिद पर rtpcr करवाया तो 16 अप्रैल को पॉजिटिव आया।मेरे दोनों डोज़ 20 दिन पहले याने की 27 मार्च को लग गए थे।16 से 22 तक पूर्ण बेड रेस्ट पर रहा ।जिंदगी में ऐसा पहली बार हुआ।कोई तकलीफ नही थी उसके बाद भी पूर्ण आराम किया एक कमरे में isolate होकर।खूब खाया 2 kg वजन बड़ा लिया।
मुझे डर ये था कि होशियारी मारी तो गंभीर हो सकते है और फिर भर्ती करना पड़ सकता है।इसलिए चुपचाप दही बनकर बिस्तर पर पड़े रहा ज्यादा होशियारी मारने वालो का रायता बन गया।
22 से 2 km वाक चालू किया
दूसरे दिन भी 2 km वाक दौड़ने पर कमजोरी महसूस हो रही थी तीसरे दिन बेटी के साथ 1 km दौड़ लिया ।इस प्रकार धीरे धीरे वर्कआउट चालू किया ।कभी साईकल कभी रनिंग कभी वाक
सभी से निवेदन है कि अपनी बॉडी को समझे और फिर ही वर्कआउट का सोचे।वैसे 2 से 3 माह आराम करना सही है।प्राणायाम कर सकते है।कार्डियो बिलकुल न करे।कम से कम 1 माह।
अब आज के ऊपर आता हूं।आज कोई मूड नही था कि 21 करूँगा।बस मन मे कही न कही टीस थी कि 3 घण्टे में भी 21 तो होए।
घर से 3 पल्स टॉफ़ी और मास्क और पॉलीथीन लेकर निकला कि कही बारिश आ गयी तो मोबाइल को रख लेंगे ।दौड़ते वक्त में मास्क नही लगाता हु।कोई पुलिस वाले अंकल मिल जाये तो लगा ले इसलिए रखता हूं सभी पुलिस वाले भी दौड़ते है दौड़ते समय मास्क advisable भी नही है।जान जा सकती है।वाक में मास्क लगा सकते है।
अब मन को बेवकूफ बनाने की स्टोरी ।आज की रन स्लो रखना थी इसलिए टारगेट रखा कि घर से एयरपोर्ट तक 4 km तक नाक से ही सांस लेना है।फिर एयरपोर्ट जाकर टारगेट को बढ़ाया की 7 km छोटा बांगड़दा तक नाक से सांस लेते हुए दौड़ना है।डॉ मोहित भंडारी दौड़ते हुए मिल गए छोटा बांगड़दा के पहले स्माइल दी एक दूसरे को और निकल गए ।
अब मन को समझाया कि 10.5 km हाफ रास्ते तक जाएंगे अगर वहाँ थक गए तो या तो लिफ्ट ले लेंगे या वाक करके आ जाएंगे।8 km पर पहली टॉफी खाई ।फिर नवीन खंडेलवाल ,सुमित रावत और हेमंत बड़ोदिया साईकल से निकले ।फिटनेस वालो को अपना जोड़ीदार मिल जाये और हाथ उठाकर हेलो भी कर दे तो जोश बढ़  जाता है।11 km हो गया फिर रन नही कर पा रहा था।प्यास भी लग रही थी।13 km पर एक नया आईडिया किया कि जब भी कोई km होगा उस समय वाक करेंगे जिससे हार्ट रेट कंट्रोल हो 168 से 145 आ जाती 100 से 150 मीटर में फिर 850 मीटर दौड़ लेता।
मतलब मन को बेवकूफ बनाना ही हुआ कि जब भी अगला km होगा आपको वाक करने को मिलेगा ।दिल भी खुश और मन भी खुश।
ऐसे करते हुए एयरपोर्ट आ गया 18 km हो चुके थे।एक दुकान से माजा की बोतल ली और 300 से 400 ml पी ली ।रॉक साल्ट और मिल जाता तो उसमें डाल देता ।वैसे 3 km ही बचा था।फिर प्रदीप राठौर जी मिल गए उन्होंने वाक करना शुरू कर दिया है उनके साथ सेल्फी ली।मेरी वाइफ हेमा का फ़ोन आ गया कि क्या आज 42 कर रहे हो क्या मैंने कहा कि सिर्फ 700 मीटर बचा है।इस प्रकार से ये मेरी कोरोना के बाद पहली हाफ मैराथन हो गयी ।
शरीर को बेवकूफ बनाओ और वर्कआउट करते रहो और खुश रहो।
सभी को धन्यवाद ये ब्लॉग पढ़ने के लिए ।मेरे बाकी के ब्लॉग भी देख सकते है ।ब्लॉगर पर।
2014 से ब्लॉग लिख रहा हु।
dr yogendra vyas
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