Monday, July 30, 2018

Rainathon 2018 ,4 aug

दोस्तो आपने अब तक रजिस्ट्रेशन तो करवा ही लिया होगा रात की मैराथन याने की rainathon 2018 का ।
4 aug 2018 को सुपर कॉरिडोर पर यह rainathon होगी हम उम्मीद कर रहे है कि बारिश हो जाये परंतु प्रकृति पर किसी का बस नही चलता है।पानी गिर जाए तो रनर के तो मजे ही मजे यदि न भी गिरे तो भी मजे ही मजे होंगे क्योकि हम सब अपने आप को स्वस्थ रखने के लिए दौड़ेंगे और मिलेंगे जुलेंगे और साथ मे डिनर करेंगे। मै सुपर कॉरिडोर पर 8 मैराथन 42 km की कर चुका हूं 40 से ज्यादा हाफ मैराथन पिछले 5 वर्षों में।बहुत बढ़िया ट्रैक है दौड़ने के लिए ।कंक्रीट से न डरे क्योकि हम जॉगर्स है हमारी स्पीड काफी स्लो रहती है इसलिए हमारे घुटनो पर कुछ विशेष असर नही पड़ता है।
जो पहली बार दौड़ रहे है उन्हें बधाई।आपने फॉर्म भरा और स्टार्ट लाइन पर खड़े हो गए मतलब की आपका 21 km हो गया समझो।ये सिर्फ माइंड गेम है।कोई फर्क नही पड़ता कि आपने 2 घण्टे में किया या 4 घण्टे में ।पहली मैराथन 21 km पूरी करना ही बहुत बड़ी बात होती है।
सबसे पहले मेरी राय सभी नए रनर को यह रहेगी कि कोई टारगेट न रखे और ये सोचकर दौड़े की में मौज मस्ती करने आया हू जितना आप रिलैक्स रहेंगे उतना अच्छे से आप रन कर पाएंगे।शुरू के 2 से 3 किलोमीटर सिर्फ वाक करे और अपने शरीर की भाषा को सुने यदि आपने प्रैक्टिस की है और आप दौड़ते हुए बात कर पा रहे है मतलब आप ठीक है।पेनिकी न हो।जब भी लगे कि ह्यूमिडिटी हो रही है या जी घबरा रहा है तो आराम करें और वालंटियर्स की मदद ले मेडिकल फैसिलिटी उपलब्ध है।
आप आफिस से या काम से आये तो 6 बजे हल्का नाश्ता करके आये और हो सके तो बाथ लेकर आये आप तरोताजा फील करेंगे ।एक ब्लैक कॉफ़ी और एक केला जरूर ले ले दौड़ के पहले।
अपने रोज के काम वैसे ही करे जैसे करते है आफिस या काम से छुट्टी कतई न ले ।वर्कआउट को अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाये ।ये सब जानकारियां नए रनर के लिए है अगर हम दौड़ नही सके तो कोई बात नही वाक जरूर करे ।
पेअर रन में कुछ भी हो जाये अपने साथी का साथ न छोड़े।क्योकि हो सकता है कि आप तेजी से दौड़ते हो आपको चिढ़ भी छूट सकती है कि इतना धीरे क्यो दौड़ रहा है मेरा साथी ।याद रखिये आप एक व्यक्ति को स्वस्थ जीवन जीने के लिए प्रेरित कर रहे हो।
इसे स्वास्थ दान भी कह सकते है किसी को अच्छी जिंदगी जीने की आदत लगाना।शायद मेरा यह ब्लॉग से मैं भी कई नए रनर को स्वास्थ्य दान दे सकू इसी अभिलाषा के साथ इसको विराम देता हूं।

Sunday, July 29, 2018

600 brm preparation

आज मैंने 90 km साइकिलिंग की विशेष कुछ नही था ।खासकर ब्लॉग इसलिए लिखने का सोचा कि हम बाद में भूल जाते है कि हमने इस बार क्या क्या किया था ।
आज सुबह उठा 4.15 am पर।और 1 ब्रेड बटर और चाय ली 750 ml पानी पिया।घर से ये सोच के निकला कि में 18की एवरेज स्पीड से ही साईकल चलाऊंगा बीच मे वाच को ऑटो पॉज में नही रखूंगा और बन्द भी नही करूँगा।शुरू के 4 km वार्म अप में निकल गए फिर पांचवे km से 45 km तक 24 से 25 की स्पीड रही जो मेरे लिए सामान्य नही थी ।एवरेज स्पीड 22.5 थी कही नही रुका ।चारपाई रेस्टोरेंट पर एक फोटो लिया और पोस्ट किया senda नमक लिया ।मेरे पैर thigh muscle में दर्द जैसा या भारीपन लग रहा था जैसे ही senda नमक लिया दर्द गायब।
57 km पर एक 500 ml की फ्रुइटी और 1 लीटर पानी की बोतल ली ।घर से 2 केले ले गया था 32 km के पहले खा गया।1 लीटर पानी की बोतल जिसमे 3 gm senda नमक 6 चम्मच शक्कर और 2 बड़े निम्बू डाल कर ले गया था।मतलब 90 km में 3 लीटर पानी लगा एक बार भी urination नही हुआ।5 कॉफ़ी बाइट खाई।
आज एक नया एक्सपेरिमेंट किया।सामान्यतः में गियर नही बदलता हु।
7 और 3 गियर पर ही गाड़ी चलाता हु आज मैंने शुरू से ही बड़े वाले 3 गियर और छोटे वाले 4 और 5 वे गियर पर ही गाड़ी चलाई।55 km के बाद बड़े सेकंड और छोटे 7 th गियर में गाड़ी चलाई जब थक रहा था।
आखिरी के 4 km 7 और 3 गियर में गाड़ी चलाई।
आज की राइड से ये सबक मिला कि प्रैक्टिस में तेज चला लो परंतु brm 600 में 18 से 19 के ऊपर नही चलाना चाहिए जिससे कि muscles थके नही और एग्जॉस्ट न हो।
4घण्टे 11 मिनट में हुई 90 km 21.5 की एवरेज स्पीड में यदि एवरेज स्पीड 19 होती तो 4 घण्टे 44 मिनट में होती ।33 मिनट बचाने के चक्कर मे थकना नही चाहिए।हर इंसान को अपनी बॉडी की सुनना चाहिए दुसरो से कभी भी तुलना न करे। उम्मीद है कि ब्लॉग से आपको फायदा होगा।
dryvyas@gmail.com
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Thursday, May 10, 2018

21 km daily nonstop run for 30 days

21 km daily for 30 days
31 मार्च को जब ब्लड डोनेशन किया उस समय मन मे विचार आया कि 1 अप्रैल से 21 km रोज रन करूँगा उस समय अपने आप पर मुझे बिल्कुल भरोसा नही था कि मै कर पाऊंगा या नही पहले एक ही बात सोची की 2 दिन करके देखे फिर जो होगा देखा जाएगा।इंदौर सुपरचार्जर की कांटेस्ट के प्रतियोगियों को मै मोटीवेट करना चाहता था।पिछले 6 माह में मैने सिर्फ 600 km की रनिंग की थी।और 3500 km की साइकिलिंग की थी 6 माह में उसमे 200,300,400 brm भी थी।
Backache के कारण मैंने रनिंग बंद की थी ।
साइकिलिंग काफी अच्छी होती है जब आपको इंजरी हो ।
खैर जब 6 दिन दौड़ते हुए हो गए तो काफी आत्मविश्वास बढ़ा।रोज सुबह अजय झांगजी का मैसेज और एक दिन पहले congratulations का मैसेज मिल जाता था मैंने कहा कि अजय जी इससे मुझे दौड़ना ही पड़ता है क्योंकि आप की बात रहना चाहिए।जितेंद्र चौहान ,मनमीत ,संजीव राजदान,राहुल तकालकर आदि सुपरचार्जर के मैसेज से जान आ जाती थी।
रोज सुबह उठना बहुत मुश्किल होता था।सिर्फ कमिटमेंट के कारण ही उठ पाता था।रोज में कहाँ दौडूंगा यह भी एक दिन पहले लिखता था जिससे किसी को साथ मे दौड़ना हो तो साथ आ जाये ।मैने एक समय फिक्स कर लिया था कि रोज 4.30 पर घर से निकलना है और 7.15 या 7.30तक घर पहुचना है।पहले के 6 से 7 दिन सुपर कॉरिडोर पर ही दौड़ा।एक दिन बेयरफुट एक दिन स्किनर्स पहन कर ।एक दिन राजेश पोरवालजी ने कहा कि मलहराश्रम आओ ।मैने कहा कि बेयरफुट में कंकर चिभते है पैर में और गोल गोल राउंड लगाना मुश्किल होता है।एक बार मे घर से दौड़ते हुए मलहराश्रम आ गया लूना सैंडल पहनकर ।12 km मलहराश्रम में दौड़ा और 9 km घर से आना जाना।
घर से रनिंग चालू करने और फिनिश करने का फायदा होता है कि आपका 40 से 50 मिनट आने जाने का समय बच जाता है।
रोज सुबह दौड़ने का मन नही होता था मन को यही समझाता था कि दौड़ चालू तो करो गाने मोबाइल के स्पीकर फोन पर चालू करके निकल जाता था कॉलोनी के कुत्ते 4 -5आकर देखते और उनकी आंख में आंख मत डालकर देखो वो बिल्कुल भी नही भोकेंगे।
उन्हें इग्नोर करो वो भी इग्नोर करेंगे।
पहला किलोमीटर हमेशा 8 मिनट और 30 सेकंड में होता था या उससे भी ज्यादा मैं बिल्कुल भी चिंता नही करता था।5 km तक आते आते एवरेज पेस 8.15के आसपास होता था अगले 5 km वार्मअप होने के बाद स्पीड भी बढ़ जाती थी और सारे दर्द भी गायब हो जाते थे।जो ankle में दर्द होता था दूसरे या तीसरे km पर वो भी खत्म हो जाता था फिर टारगेट पेस 7.52 के लिए 5 से 10 km थोड़ा तेज दौड़ता था जिससे 8.15 से 7.52का पेस आ जाये ।
7.52 का पेस मैने इसलिए चुना था कि मै सभी 21 km के रन 2 घण्टे 45 मिनट में ही करूँगा कभी भी उसके ऊपर यानी 2 घण्टे 46 मिनट हो गया तो मै छोड़ दूंगा।
जैसे ही 10 km होते मै बेफिक्र हो जाता कि आज का दिन तो अब निकल ही जायेगा।
मेरा इंदौर मैराथन में पेस 5.55 और 2 घण्टे 4 मिनट का समय था।40 मिनट स्लो रन किया जिससे इंजरी नही हुई और करीब 2 min स्लो पेस।
सुपर कॉरिडोर पर मेघना के साथ दौड़ते हुए एक बार पथ्थर गढ़ गया पैर में ।उसने बहुत परेशान किया जब भी कोई कंकर उसी जगह लगता तो चीख निकल जाती थी इसलिए उसे ठीक करने के लिए लूना सैंडल मजबूरी में पहने।कितनी बार तो ऐसा हुआ कि सैंडल से discomfort हो रहा था ankle में दर्द बढ़ रहा था तो सैंडल कमर के बेल्ट में फंसा कर दौड़ने लगा।
21 km रोज दौड़ने में 2 चीजो का बहुत ध्यान रखना पड़ता था ।
एक तो पौष्टिक खाना
दूसरा रिकवरी
घर से जब निकलता था तो एक ब्लैक कॉफ़ी 10 बादाम 2 बिस्कुट खाकर निकलता था 1 लीटर पानी सुबह उठते ही पीता था।हाइड्रेशन बहुत जरूरी है।अपने साथ 600 ml की बोतल ले जाता था उसमें 3 fastandup की इलेक्ट्रोलाइट की टेबलेट डालता था 2 निम्बू और 4 चम्मच शक्कर।
साथ मे 3 -4 कॉफी बाईट और पल्स टॉफी ले जाता था।
घर आकर सबसे पहले नहाता था फिर स्ट्रेचिंग और 500 ml ढूध और 15 gm whey प्रोटीन on का लेता था फिर पोहा या उपमा एक केला 1 घण्टा रेस्ट 9 से 10 फिर क्लिनिक साढ़े दस से 2 बजे और फिर लंच में 2 रोटी दाल चावल सब्जी दही ।डेढ़ घण्टे आराम वापस ।5 से 6 बजे तक ankle की बर्फ से सिकाई ।हाँ एक बात बहुत जरूरी है कि घर से निकलता जब वजन 72 और वापस दौड़ कर आता तो 70.5 होता था मतलब की 3 लीटर sweat loss होता था 3 घण्टे में जब शाम को अच्छे से urination होती थी और यूरिन आउटपुट अच्छा होते ही पैरो का दर्द खत्म हो जाता था ।दिन भर में 6 लीटर पानी पी जाता था।
शाम को साढ़े 6 से साढ़े 8 क्लिनिक और साढ़े 9 बजे सो जाना।
यह सब इसलिए लिखा कि कोई यह करना चाहे तो काफी अनुशासन में रहना पड़ता है।
शरीर कहता है कि आराम करो ,मन कहता है कि जो कमिट किया है वो करो।ये द्वंद रोज चलता था।एक तो सुबह उठ जाओ दूसरा घर से बाहर निकल जाओ भले ही पैर मना करे।और आधा घण्टा रोते गाते भी दौड़ लिया मतलब आपकी दौड़ पूरी हो गयी।3 घण्टे के वर्कआउट में शुरू के 30 मिनट ही महत्वपूर्ण होते है।
बीच मे जब 21 दिन हुए तो डॉ पारिख सर ने कहाँ की अब खत्म कर दो मैंने सर से वादा किया कि मैं अभी एकदम ठीक हु और बिल्कुल इन्जुरेड होकर रन नही करूँगा।आखिरी के 7 दिन मैंने सोचा कि यूनिवर्सिटी में रन करूँगा ।वहाँ पर डॉ पासी ,गुरिंदर,अपूर्व मिश्र जी,अखिलेश जैन,संजय बिरला,मंगा जी,barfa जी आदि काफी लोग मिल जाते थे ।स्ट्रेचिंग करने में या यूनिवर्सिटी के मोड़ के कारण मुझे 26 वे दिन मोच आ गयी ।लेफ्ट एंकल शाम 6 बजे तक भी दर्द कर रहा था मैंने सोचा कि अब समय आ गया है छोड़ने का।हेमा ने पहली बार मुझे कहा कि अब 4 दिन तो बचे है कर डालो मैने कहा कि मजाक नही है।सुभाष मसीह जी की व्यक्तिगत पोस्ट मुझे काफी प्रोत्साहित करती थी।एक बार नीरज याग्निक जी से बात हुई उन्होंने कहाँ की जो आपको अच्छा लगे वो जरूर करो यही बात विवेक सिंघल जी ने भी कही ।
21वे दिन सुरेश लाहोतीजी,विकास जैन,अर्पित जैन,मोहित,जोनी भाई नीरू भाभी,संदीप कायल,पारिख सर,अजय झांग ,डॉ जितेंद्र माधवी ,आये बहुत अच्छा लगा ।आखिरी दिन विजय जी,रजनीश जी,अजय झांग,अखिलेश,जावेद खान,पारिख सर,डॉ जोशी सर आदि लोग आए ।
इस रन का मकसद ये था कि थोड़ा endurance बढ़ जाये।वजन घट जाए।और सभी को दौड़ने के लिए प्रेरित कर सकूं।
उम्मीद है कि यह ब्लॉग सभी को पसंद आया होगा।पढ़ने ले लिए धन्यवाद।
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Tuesday, March 13, 2018

आराम करने का फायदा

इस बार मैं अपने पिछले 6 माह के अनुभव को सबके साथ साझा कर रहा हू।
एक समय था जब मैं अति करता था।मेरी पहली मुम्बई मैराथन के पहले मैंने इंदौर में 5 बार 42 km की रन की थी प्रत्येक रविवार और 6th sunday को मुम्बई मैराथन की थी ।2014 में।
फिर एक माह तक यूनिवर्सिटी में 10 km डेली बेयरफुट रनिंग की थी।
ज्यादा वर्कआउट करने से मुझे सभी प्रकार की इंजरी हुई।
उसमे itb iliotibial band syn बैंगलोर अल्ट्रा के बाद 50km की रन 9 घण्टे में कई थी उससे चिढ़ कर 15 दिन बाद ही davv में 50 दौड़ा 7 घण्टे 40 मिनट में।
फिर मंथली मैराथन और करने लगा उससे itb हो गया।
अब मुद्दे की बात 4 वर्षो बाद अब समझ मे आया कि रेस्ट या आराम कितना जरूरी है।
मैं यह ब्लॉग विशेषकर नए रनर के लिए ही लिख रहा हु कितनी बार हम तालियों की गूंज के बीच फैसला ही नही कर पाते है कि हम कुछ गलत कर रहे है।
शरीर को रिकवरी के लिए समय लगता है ।वो समय जरूर देना चाहिए।
sept 2017 से मेरी कमर में हल्का सा दर्द होने लगा मैं उसे इग्नोर करता गया और फिर आखिर कार वाक भी नही कर पा रहा था तो डॉ जितेंद्र बरनिया ने कहा कि अपन brm 200 300 करते है मैं तैयार हो गया ।लोकेश त्रिवेदी जी के साथ mhow की ट्रिप कई बार लगाई।
200 हो गयी 9 घण्टे और 30 मिनट में बहुत खुश था।
उसके बाद iim की रेस में भाग लिया फ्लैग ऑफ भी किया और दौड़ा भी 2 घण्टे 12 मिनट में पूरी की ।अच्छा समय निकला मेरे हिसाब से ।फिर भोपाल मैराथन 3 dec को थी उसमें काफी हिल रनिंग थी फिर भी अपना समय 2 घण्टे 11 मिनट रहा 21 km के लिए और फिर 300 km साइकिलिंग 9 dec को और 16 dec को 400 km साइकिलिंग भी कर ली।सिर्फ आराम करके ही मेरे पास मुम्बई मैराथन की ट्रेनिंग का बिल्कुल समय नही था।आखिरी के 12 दिन आराम करना था और 18 दिन में 3 बार 21 km किया और एक बार 35 km किया।
आराम का फायदा ये रहा कि मुम्बई मैराथन में मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया 42 km 4 hrs 53 min
उसके बाद अपनी इंदौर मैराथन में 2 घण्टे 4 मिनट में 21 km किया जो कि मेरा सर्वश्रेष्ठ समय रहा 21 km का।
कहने का मतलब यही है कि वर्कआउट कम करो बॉडी की सुनो ।जब muscle में बिल्कुल soreness न हो जब ही वर्कआउट करे।
मैं कोई gym नही जाता हूं ।सिर्फ 5 km वाक डेली करता हु या 20 km साइकिलिंग डॉ हेमा के साथ करता हु।
साइकिलिंग के मेरे अनुभव खट्टे मीठे रहे है।300 brm के समय सोनकच्छ से देवास तक बगैर लाइट के साईकल चलाई थी।
400 brm में 220 km पर साईकल पंक्चर हो गयी थी और उसके बाद ब्रेक चिपक रहे थे पिछले वाले इसलिए बगैर ब्रेक साईकल चलाई 180 km नतीजा ये रहा कि क्षिप्रा पर मुझे नींद का झोंका आया और अगला ब्रेक लगाया और में ब्रिज से टकरा कर गिर गया था।
24 feb को 600 km brm का भी कुछ अलग ही अनुभव था।
मैं इंदौर से रतलाम तक अच्छी साईकल चला रहा था 24 कि avg स्पीड थी 80 km तक फिर dehydrated होने लगा ।रतलाम में खाना भी नही खाया और जल्दी से निकल गया।ये एक बहुत बढ़ी गलती थी ।मुझे आराम करना था ।उसके बाद घाटा बिल्लोद पर शाम को 7 बजे रास्ता भटक गया और बेटमा बाईपास पर निकल गया और फिर 5 km के बाद मुझे लगा कि कुछ गलत रास्ते पर हु।फिर पलटा और वापस घाटा बिल्लोड से पीथमपुर होते हुए राऊ जाना था में mhow के सोनवाय और भैंसलाय गांव की तरफ चला गया ।
परेशान होकर जब 10 .40पर iim rau पहुचा तो क्विट करने का सोच लिया था क्योंकि मुझे नींद आ रही थी।kk yadav,  manish ,गिरीश भालेराव आदि ने मेरी हिम्मत बंधाई फिर नीरज याग्निक ,डॉ जितेंद्र बरनिया और अजय झांग ने भी रात को 12.30तक मुझे समझाने की कोशिश की की मत छोड़ो परंतु में टूट चुका था नींद आ रही थी मैने कहा कि 600 brm से ज्यादा जरूरी मेरी जान है।सभी का यह अहसान में जिंदगी भर नही भूलूंगा।मुझे काफी सपोर्ट किया।
कभी भी क्विट करने से न डरे ।अगर जान बची तो आज या कल कभी भी 600 brm कर लेंगे।
10 मार्च को मैने नया अनुभव लिया 2 घण्टे सेहोरे में रुका भी और अच्छे से खाना खाया।और रात को 2 से 5.30 बजे तक घर आकर सोया और 6.15 सुबह से 11 बजे तक मे 90 km साईकल चलाई ।यानी कि 29 घण्टे में 400 km अब सेप्ट में 600 km साइकिलिंग का अंतिम प्रयास करूंगा ।
सोकर भी 600 brm की जा सकती है 3 घण्टे सोने के बाद उज्जैन पंथ पिपलाई तक गया था ।90 km मैन 4 घण्टे 45 मिनट में पूरा कर लिया ।रेस्ट से फायदा होता है ।अंतिम निष्कर्ष यही है।
सभी को ये ब्लॉग अच्छा लगेगा और मेरे अनुभव से किसी को फायदा होगा।
सभी को धन्यवाद इतना लंबा ब्लॉग पढ़ने के लिए
dr yogendra vyas
dryvyas@gmail.com
14 march 2018

Monday, December 18, 2017

300 और 400 km brm

9 dec 2017 को 300 brm थी और 16dec 2017 को 400brm थी।
मेरी कमर में दर्द चल रहा था 2 माह से रनिंग नही कर पा रहा था सोचा कि साइकिलिंग कर लूं।डॉ जितेंद्र बरनिया ने भी मुझे प्रेरित किया कि 200 300 और 400 कर ले।
5 nov 2017 को 200 आराम से हो गयी थी।
9 dec को 300 km में काफी तकलीफे आयी आष्ठा के पहले कोठरी गांव में साईकल पंक्चर हो गयी फिर सोनकच्छ से देवास के रास्ते मे साईकल की लाइट बंद हो गयी अंधेरे में साईकल चलाना बहुत खतरनाक था।पीछे से ट्रक आते तो लाइट मिलती जैसे ही ट्रक निकले एकदम अंधकार छा जाता।मैने मन ही मन मे सोचा की अब कभी लंबी साइकिलिंग नही करूँगा।
देवास से 5 km पहले हेमंत बड़ोदिया के दोस्त ने मुझे रोका की आप को लाइट चाहिए न हेमंत आपका इन्तेजार कर रहे है।हेमंत जी ने अपनी आगे और पीछे की लाइट मुझे दी।
देवास टोल पर रविकांत अंकुर माहेश्वरी पंकज शर्मा और मार्शल अंकित मिल गए ।उस समय 250 km साइकिलिंग हो गयी थी।
मैंने सुबह साबू दाने की खिचड़ी खाई थी इसलिए मैंने क्रिसेंट पर एंट्री की और निकल गया खाना नही खाया
183 km पर साईकल पंक्चर हुई 35 min लग गए।
फिर अंधेरे में गाड़ी की स्पीड भी कम हो गयी और राम राम करते 300 km हो गया।11 बजे पहुचा होटल इंफिनिटी।
3 घण्टे पहले हो गया।मैंने आते ही ग्रुप पर पोस्ट किया कि में लंबी दूरी की साइकिलिंग से सन्यास ले रहा हु।उसके बाद सभी मित्रों की प्रतिक्रिया आई ।नीरज भैया और प्रवीण पराशर की प्रतिक्रिया के बाद मैंने अपना फैसला बदला की में अगले शनिवार 16 dec को 400 करूँगा।

डाॅ योगेन्द्र जी व्यास की पोस्ट पढ़ी जिसमें उन्होंने सुरक्षा की दृष्टि से लम्बी दूरी वाली याने BRM से सन्यास लेने की घोषणा कर दी..... आप एक जुझारु खिलाड़ी होने के साथ साथ कईयों के लिए प्रेरणा स्त्रोत है... 21 दिन 21km आप ही तो लाए थे ना,आप उम्र के इस पड़ाव पर जो कर रहे हैं वो.... (शब्द नही मेरे पास)
दरअसल BRM के ये जो नियम हैं वो विदेशियों द्वारा उनके देश के हिसाब से बनाए गए हैं.... पिछली 3 BRM का जिक्र करूं तो-भोपाल बायपास की सड़क ऐसी कि डाॅ बेंजामिन साहब का पहिया गोल की जगह चौकोर होने लगा (हरीश जी के भोपाल वाले मैकेनिको ने कहा कि यह ठीक नही हो पाएगा),डाॅ आर बी की साइकल 200 brm में जवाब दे गयी व कल वाली brm में विजय भावसार जी को एक मोटर साइकिल वाले ने ऐसी टक्कर मारी की पूरा गेयर सिस्टम ही टूटकर हाथ मे आ गया.... यदि यहां पर extra cycle से इन्हें मदद न मिली होती तो निश्चित ही इन्हें अपनी राइड छोड़ना पड़ती।
सफर के दौरान हम भले खाने की व्यवस्था ना करें पर मैकेनिक की व्यवस्था जरूर रखें... पूर्व में इसतरह की व्यवस्था होती रही है... हमे BRM को आगे बढ़ाना है... नये नये SR तैयार करना है।
हां डाॅ साहब आपने SR बनने की ठानी है आप अवश्य ये सफर पूरा करेंगे... मै आने वाली 400 व 600 आपके साथ करूंगा... आपका यह सन्यास मुझे मंजूर नहीं...🙏🙏🙏नीरज याग्निक जी की पोस्ट

DrVyas आप महान है,,, और  रहेंगे,,,,,,, आप की तुलना किसी भी Marathoner या cyclists से नहीं की जा सक्ती,,,, BRM का struggle मै ने भी खूब किया है.... रेस मे Fail हो कर फिर पास हुआ हू... कोई भी class एक attempt मे पास नहीं की है..😃 इस लिए.. आप BRM quit नहीं करेंगे.
प्रवीण पराशर जी की पोस्ट

🙏🌹🙏आज सुबह ही मेने मेरा नाम 400 km से हटा दिया था।
परंतु फिर में मेरी साईकल लेने डॉ जितेंद्र के घर गया ।डॉ जितेंद्र ने कहा कि एक रात की और बात है 400 कर लो ।रास्ते मे धीरे धीरे साईकल चलाते हुए आत्ममंथन करता हुआ आया।
मैंने सोचा कि मैने commit किया है कि में firefox road runner से brm 200 300 400 600 करूँगा।
नीरज भईया ने भी कुछ जोश दिलाया था कल
में फिटनेस की दुनिया से क्विट नही करूँगा।एक बार तो कर ही लू।17 घण्टे चला ली 6 घण्टे और सही
400 तो कर ही लू
ये एक माफिया ग्रुप जैसा हो गया है फिटनेस का बुखार एक बार इसमें उतर गए तो आप इस मे से निकल नही सकते हो।
मैंने सोच लिया है कि 2 टोर्च लेकर चलूंगा।183 km पर 32 मिनट लगे पंक्चर बनवाने में
251 km पर 15 मिनट लगे
रविकांत पंकज शर्मा मार्शल अंकुर माहेश्वरी जी मिल गए थे
17.19 टोटल समय था 15 .29 hr मूविंग टाइम था।
105 मिनट का ब्रेक लिया कुल 17 घण्टे में उसमे 45 min हटा दे तो एक्चुअली 60 min का ब्रेक
मुझे खुशी है कि मैं बगैर खाना खाएं नॉनस्टॉप साईकल चलाई।
6 केले
4 लीटर पानी
छाछ सेन्दा नमक 1 लीटर
निम्बू पानी 1 लीटर
नारियल पानी नीरज भाई के सौजन्य से
2 कैडबरी 20 वाली
2 फुल चाय
3 पाउच कॉफ़ी डायरेक्ट मुँह में
🙏🙏🙏🙏🙏

ये सब पोस्ट रिपीट इस लिए की की किसी के कहे हुए दो शब्द से कितनी ऊर्जा मिलती है।अगर प्रेरणादायी शब्द न मिलते तो 400 करने की इच्छा ही नही होती।
साईकल को तैयार करवाई महेश करड़ा जी से 2 टोर्च ली।साईकल के टायर ट्यूब चेंज करवाये और डॉ जितेंद्र के घर गाड़ी रख दी।
16 dec 2017 को सुबह हेमा मुझे कार से छोड़ने आई ।5.30 am पर हम लोग निकल गए 400 के सफर पर।
मन मे बिल्कुल विश्वास नही था इसलिए मैडल के पैसे जमा नही कराए।हो गया तो हरि कृपा न हुआ तो हरि इच्छा विजय सोहनी जी का ब्रम्ह वाक्य लेकर साइकिलिंग चालू की ।
आप मानेंगे नही मेरे जैसे जिद्दी आदमी को शुरू के 20 km में पसीने छूट गए सभी काफी आगे निकल गए थे कम से कम 8 फ्लाईओवर आते है शिप्रा के पहले ।में दुआ कर रहा था कि पंक्चर हो जाये और में वापस घर चला जाऊं।
thigh muscle में हल्की सी soreness हो रही थी।
7 दिन पहले ही 300 किया था।
खैर डॉ आर बी सिंह बृजभूषण और लोकेश त्रिवेदी 20 km बाद मिले तो जान में जान आई।
rb singh मेरे साथ 10 से 15 km चले।
मैंने एक बात का गौर किया कि मेरी स्पीड काफी कम थी क्योंकि हाइब्रिड बाइक है।300 km में मैंने 20.5 की एवरेज स्पीड में सिहोर पहुचा था 400 में  में सिहोर 18.5 की एवरेज स्पीड से पहुचा ।
में मन ही मन अपने आप की गालिया दे रहा था कि क्यो में 400 कर रहा हु।क्या जरूरत है।कौनसा अवार्ड मिल जाएगा।
पास से कंटेनर निकलते थे और चार्टर्ड बस निकलती तो लगता था कि गए अपन तो ।
मेरी तौबा मेरे बाप की तौबा में ऐसी गलती नही करूँगा बोलते बोलते क्रिसेंट होटल सिहोर आ गए और फिर दाल चावल जीरा आलू खाये 45 मिनट आराम किया स्ट्रेचिंग की और निकल गए भोपाल बाईपास रोड के लिए।
206 km पर विजय भावसार के एक परिचित मैडम ने हम सब की अच्छी खासी खात्री की कॉफी पिलाई 25 मिनट आराम करके निकले और फिर साईकल पंक्चर हो गयी।

मेरा पहला 400 km में बृजभूषण शुक्ल को समर्पित करता है।उसके अलावा शेखर मोहरिकर और रामकृष्ण न होते तो 400 km न कर पाता
बृज ने मेरी साईकल का पंक्चर भी बनाया और पहिया निकाल कर tube भी बदला ।और 200 से 280 km तक मेरे साथ साईकल चलाई ।लोकेश त्रिवेदी और डॉ rb singh ने फैसला लिया था कि dr vyas को अकेले नही छोड़ना है।
शेखर और रामकृष्ण ने आखिरी के 80 km में मुझे साथ दिया मेरी रात को जागने की आदत नही है।29 घण्टे जागना बहुत महंगा पड़ा सुबह क्षिप्रा के ओवर ब्रिज पर नींद का झोंका आया और में पुल से टकरा कर जमीन पर गिर पड़ा ।वो तो हरि कृपा थी अगर ब्रिज से नीचे गिरता तो ।
खैर सभी साथियो का धन्यवाद सभी ने सहयोग दिया तो एक बार मे ही 300 ओर 400 हो गयी
मेरी सभी से गुजारिश है 300 और 400 firefox हाइब्रिड से न करे।
में यदि 600 करूँगा तो विजय सोहनी जी की ट्रेक सही करूँगा।
कल 25 बार नींद के झोंके आये।वापस कहूंगा कि हाईवे पर 400 600 सब खतरनाक है।सुरक्षित नही है
सभी शुभचिंतको की शुभकामनाओ से 400 km साईकल का सपना पूरा हो गया।
अजय झांग जी ने एक दिन पहले मुझे गाइड किया कि कैसे करना है।
मुझे लगता है कि मेरी हाइब्रिड की बजाय रोड बाइक होती तो मुझे इतना संघर्ष न करना पड़ता।
fastandup tablets मैंने 10 से 12 खाई
सेन्दा नमक और और पानी 8 लीटर लिया।
ब्लॉग को पढ़ने के लिए धन्यवाद ।सभी को वापस से धन्यवाद जो मुझे इतनी हिम्मत दिलाई की ये काम मे कर पाया
डॉ योगेंद्र व्यास